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August 11, 2020
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राजनीति

गरीबों, दलितों के मसीहा थे विद्यासागर, नारी सशक्तिकरण की रखी थी बुनियाद

नई दिल्ली। प्रख्यात समाज सुधारक एवं शिक्षाविद ईश्वरचंद्र विद्यासागर को आज उनकी पुण्यतिथि पर केंद्रीय मंत्रियों एवं अन्य नेताओं ने याद किया है। उन्होंने कहा कि विद्यासागर ने आधुनिक भारत की नींव रखने में महति भूमिका निभाई थी। इसके अलावा नारी सशक्तिकरण की बुनियाद भी उन्होंने ही रखी थी।

गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा, “मैं ईश्वर चंद्र विद्यासागर जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन करता हूं। एक प्रतिष्ठित समाज सुधारक और बंगाल पुनर्जागरण के स्तंभों में से एक, जिन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए एक प्रमुख भूमिका निभाई। उनके अथक प्रयासों ने कई सामाजिक बुराइयों को मिटाया और विधवाओं के पुनर्विवाह अधिनियम को संभव बनाया।”

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि प्रसिद्ध समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी एवं महान शिक्षाविद ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत्-शत् नमन। उन्होंने विधवा पुर्नविवाह, महिला सशक्तिकरण तथा बंगाल पुनर्जागरण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

केंद्रीय मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, ” ‘विद्या’ सबसे अनमोल ‘धन’ है, इसके आने मात्र से ही सिर्फ अपना ही नहीं अपितु पूरे समाज का कल्याण होता है। प्रख्यात विद्वान, शिक्षाविद, लेखक एवं समाज सुधारक ईश्वर चन्द्र विद्यासागर की पुण्यतिथि पर उन्हें शत्-शत् नमन।

उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भारतीय पुनर्जागरण के प्रमुख स्तम्भ, मानवतावादी, दार्शनिक, शिक्षाशास्त्री एवं समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि “एक मनुष्य का सबसे बड़ा कर्म दूसरों की भलाई और सहयोग होना चाहिए जो एक राष्ट्र का निर्माण करता है।”

उल्लेखनीय है कि विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर,1820 को मेदीनीपुर में एक निर्धन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह स्वतंत्रता सेनानी भी थे। ईश्वरचंद्र को गरीबों और दलितों का संरक्षक माना जाता था। उन्होंने नारी शिक्षा और विधवा विवाह कानून के लिए आवाज उठाई और अपने कार्यों के लिए समाज सुधारक के तौर पर पहचाने जाने लगे। उन्हें बंगाल में पुनर्जागरण के स्तंभों में से एक माना जाता है। उनके बचपन का नाम ईश्वर चंद्र बंद्योपाध्याय था। संस्कृत भाषा और दर्शन में अगाध ज्ञान होने के कारण विद्यार्थी जीवन में ही संस्कृत कॉलेज ने उन्हें ”विद्यासागर” की उपाधि प्रदान की थी। इसके बाद से उनका नाम ईश्वर चंद्र विद्यासागर हो गया था।​

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