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Lucknow
October 21, 2020
Janta ka Safar
सफर

​*शुक्र* मनाओ जनता हाथ बाँध कर बैठी है*

​*शुक्र* मनाओ जनता हाथ बाँध कर बैठी है*

निर्भयता से निर्भया की तरह गई एक और निर्भया है

आज न्याय का पुलिंदा भी कानून के साथ में बह गया है

इस तरह कब तक सिर्फ केंडल मार्च निकलेंगे

केवल निंदा, शोक, केंडल ही जिंदा है इंसान तो मर गया है

निर्भया की माँ की तरह आस लिए माँ बैठी है

शुक्र! मनाओ जनता हाथ बाँध कर बैठी है

दरिंदों से पूछना मत की क्या है उनकी अंतिम इच्छा

फांसी नहीं चौराहे पर गोली मारों बेटी की थी अंतिम इच्छा

ना धर्म, जाति और मजहब से जोड़ों इसको

चौराहे पर ही गोली मारों दरिंदों को सबकी यही है इच्छा

माँ को छोड़ वो धरती माँ के गोद में बैठी है

शुक्र! मनाओ जनता हाथ बाँध कर बैठी है

 

कवि दशरथ प्रजापत 

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