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May 7, 2021
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The Story Of Ramayan: हनुमान जी ने अपनी रचित रामायण समुद्र में फेंक दी, जानें क्या है पौराणिक मान्यता

hanuman ramayan

लखनऊ: मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम की जीवन कथा रामायण (The Story Of Ramayan) के रूप में प्रचलित है। महर्षि वाल्मीकि (Maharishi Valmiki) ने सबसे पहले इसे लिपिबद्ध किया था। पर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पहली रामायण महर्षि वाल्मिकी ने नहीं बल्कि श्रीराम के परम भक्त पवन पुत्र हनुमान ने लिखी थी।
वैसे दुनिया भर में अब तक इसके अलावा अब तक 300 से अधिक रामायण (The Story Of Ramayan) की पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं। यह रामायण 24 से ज्यादा भाषाओं में आज भी पढी जाती है। फिलहाल पूरे देश में गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरित मानस (Ramcharit Manas) प्रचलित है।

हाथ के नाखूनों से लिखी रामायण

जब मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम लंका पर ​विजय प्राप्त कर अयोध्या वापस लौटे तो हनुमान जी ने उनसे अनुमति ली और तपस्या के लिए हिमालय चले गए। पौराणिक मान्यता है कि वहीं पर उन्होंने श्रीराम की याद में अपने नाखूनों से पत्थर की शिलाओं पर पहली रामायण (The Story Of Ramayan) लिखी और उसे शिवजी को दिखाने कैलाश पर्वत पहुंचे। कुछ दिन बाद महर्षि वाल्मिकी भी अपनी रचित रामायण लेकर कैलाश पहुंचे। पर वहां पहले से मौजूदा शिलाओं पर रचित रामायण देखकर निराश हुए। हनुमान जी ने जब इसकी वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि भविष्य में हनुमान रचित रामायण (The Story Of Ramayan) की वजह से उनके रामायण की उपेक्षा हो सकती है। ऐसी मान्यता है कि यह सुनकर हनुमान महर्षि वाल्मिकी को अपने एक कंधे पर व शिला को दूसरे कंधे पर लेकर समुद्र के पास पहुंचे और अपनी शिला को समुद्र में विसर्जित कर दिया।

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