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August 11, 2020
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आत्मनिर्भर श्रमिक, पैतृक भूमि में सब्जी की खेती कर बदली किस्मत 

सुल्तानपुर । अमेठी का एक प्रवासी श्रमिक ने अपने मित्र के साथ पैतृक भूमि में आधुनिक सब्जी की खेती कर आत्मनिर्भर बनने की कोशिश को साकार कर लिया है। अब वे गांव से लेकर मंडी तक ताजी सब्जी पहुंचाकर रोजाना कमाई कर मालामाल हो रहे हैं।

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के कारण पूरे देश से हर प्रवासी श्रमिक एक आस को लेक अपने गांव व घर की ओर लौटा। कोई 200 किलोमीटर पैदल यात्रा किया, तो किसी ने 800 किलोमीटर की पदयात्रा की। एक समय था कि हर कोई रोजगार की तलाश में गांव से शहर की ओर जाता था, लेकिन कोरोना महामारी ने फिर एक बार ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोगों को गांव में ही रहकर स्वरोजगार करने को विवश किया है।

सड़कों पर रातभर चलना पड़ा पैदल 

ऐसे ही एक प्रवासी श्रमिक अमेठी जिले के सनहा गांव निवासी युवक ​​बृजेश कुमार यादव ​हैं जिनका कहना है कि ​वो एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। पूर्णबंदी शुरू होते ही घर को पहुंचने के लिए लालायित हुआ। बड़ी मुश्किल से अपने साहब की गाड़ी से बरेली से चलकर लखनऊ पहुंचा, उसके बाद लखनऊ में कोई साधन न मिलने के कारण साधन की तलाश में रातभर लखनऊ की सड़कों पर 40 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। भूख और थकान के कारण हाल-बेहाल हो गया था। एक प्राइवेट वाहन के सहारे अपने घर तक पहुंचा। उसके बाद शपथ थी कि अब अपने गांव में ही कोई काम शुरू करेंगे।

​बृजेश का कहना है कि पैतृक खेती में ही आधुनिक सब्जी की खेती अपने मित्र जुबेर के साथ मिलकर शुरू कर दी। अपने एक अन्य मित्र युवराज मौर्या से सलाह लेकर सब्जी की खेती शुरू कर दी। खेत में लौकी, करेला, नेनुआ तैयार कर लिया। पहली बार तैयार सब्जी को अमेठी, सुल्तानपुर की मंडी में पहुंचाया। अपने आसपास के गांव के लोगों को भी ताजी सब्जी दे रहे हैं। बताया कि ताजी सब्जी पाकर गांव के लोग जहां खुश हो रहे हैं, वहीं रेट से कुछ ज्यादा भुगतान भी करते हैं।

बृजेश ने बताया कि अभी यह पहली बार सब्जी की खेती का अनुभव है। आगे हम और अच्छी खेती करने का प्रयास करेंगे। अभी सरकार से हमें कोई सहायता नहीं मिली है ना ही कोई सलाह देने आया है। बताया कि सब्जी की खेती से जहां रोजाना आमदनी हो रही है, वहीं गरीब व सेवा बस्ती में रह रहे लोगों की सेवाएं भी हो रही है। बताया कि तोड़ी गई सब्जी में से जो बिकने से बच जाता है, उसे इन बस्तियों में बांट देते हैं।

छुट्टे जानवर सबसे बड़ी समस्या, करनी पड़ती है रखवाली

युवा किसान बृजेश ने बताया कि छुट्टे जानवर ही सबसे बड़ी समस्या है। खेत की रखवाली के लिए दिन में तो रखवाली करनी ही पड़ती है, साथ में पूरी रात जागना पड़ता है। जब 50 से 100 की झुंड में एक साथ छुटे जानवर चलते हैं तो पूरा खेत साफ कर देते हैं, ऐसे में यदि रखवाली नहीं करेंगे तो सारी मेहनत पर पानी फिर जायेगा। ​

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