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November 30, 2020
Janta ka Safar
सफर

पाकिस्तानः फौज-आईएसआई के खिलाफ पुलिस का मोर्चा

बीते एकाध दिनों से पाकिस्तान की सड़कें विद्रोह की लपटों में सुलग रही हैं। यह विद्रोह सुरक्षा सिस्टम से जुड़े लोगों के बीच हो रहा है। राजनीतिक दलों के लोगों को सार्वजनिक रूप से चौक-चौराहों, गली-सड़कों जगहों पर लड़ते देखा गया था लेकिन पहली मर्तबा ऐसा देखने को मिल रहा है जब सुरक्षा से जुड़ा अमला आमने-सामने आकर एक-दूसरे के खून का प्यासा हो गया है। ऐसी स्थिति में मौजूदा इमरान सरकार मौन है। उनके मौन को ललकारते हुए पीएमएल नेता मरियम नवाज ने इमरान सरकार की तीखी आलोचना की है।

कराची में तीन दिनों से सिंध पुलिस ने अपनी सेना और आईएसआई के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। मोर्चे की आड़ में भारी विद्रोह है। फायरिंग, आगजनी और जमकर तोड़फोड़ हो रही है। पुलिस का विद्रोह जब पाकिस्तानी सेना के बर्दाश्त से बाहर हुआ तो फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें सिंध पुलिस के लगभग दर्जन भर पुलिस अधिकारी मारे गए। तनातनी के बाद पुलिस के कुछ बड़े अधिकारियों को आईएसआई ने जबरन कैद कर लिया, जिससे पुलिस विभाग और भड़क गया। पाकिस्तान के लोग इस वक्त तीन धड़ों में बंटे हुए हैं। कुछ पुलिस के पक्ष में हैं, तो कुछ सेना और आईएसआई के समर्थन में। मध्यम और गरीब वर्ग पुलिस के साथ है।

कराची की सड़कों पर आधी रात के समय भी लोग प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी सेना के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। इमरान खान का झुकाव फिलहाल सेना की ही ओर है। सभी को पता है कि पाकिस्तान की हुकूमत सेना-आईएसआई के बिना नहीं चल सकती। कोई भी फैसला उनकी इजाज़त के बिना नहीं ले सकता। अगर कोई जुर्रत भी करता है तो वहां की फौज सरकार का तख्तापलट करने में देर नहीं करती। इसलिए न चाहते हुए भी इमरान खान पुलिस का पक्ष नहीं ले पा रहे। इमरान के इस रवैये से माहौल और गरमा गया है। कुल मिलाकर इमरान खान सरकार इस वक्त चारों तरफ से घिर चुकी है।

हिंदुओं का धर्मांतरण का मसला भी गर्म है। धर्मांंतरण को लेकर पिछले माह सरकार ने सीनेटर अनवारूल हक काकर की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया था जिसे हिंदुओं के धर्मांतरण की सच्चाई की जांच करनी थी। दो दिनों पहले आयोग ने अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक की तो सरकार घिर गई। आयोग की जांच में खुलासा हुआ कि पाकिस्तान में हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन किया जाता है। वहां लंबे समय से चले रहे अत्याचार और धर्मांतरण के मामले पर अब पाकिस्तान संसद ने भी मुहर लगा दी है। संसदीय समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद पाकिस्तान के हिंदु संगठनों ने भी सरकार के खिलाफ हंगामा शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के सिंध इलाके में बीते एकाध वर्षों में सबसे ज्यादा धर्मांतरण के केस दर्ज हुए।

पुलिस-सेना के बीच फैले विद्रोह में समूचा पाकिस्तान जल रहा है। शाॅपिंग माॅल, दुकानें, स्कूल-काॅलेज, सिनेमा हाॅल, बाजार सभी बंद हैं। सेना के सिंध पुलिस पर गोलियां चलाने के बाद कराची में भीड़ इस कदर उग्र है, जिसे सरकार को संभालना मुश्किल होता जा रहा है। वहां की मीडिया पर भी सेना ने कब्ज़ा कर लिया है ताकि उनके खिलाफ कोई खबर बाहर न जा सके। कुछ पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया है।

पाकिस्तान के मौजूदा हालात पर भारत सरकार की पैनी नजर है। इस्लामाबाद स्थिति अपने दूतावास के अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट पर रहने को कह दिया है। दरअसल, वहां माहौल तब खराब हो गया, जब सेना और सिंध पुलिस के बीच क्रॉस फायरिंग में पाक सेना के जवानों की मौत हुई। पुलिस की एकजुटता को देखते हुए आईएसआई और फौज के हाथ-पांव फूल गए। नवाज शरीफ के दामाद की गिरफ्तारी के बाद स्थिति बेकाबू है। उनके समर्थक इमरान सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं।

सेना-पुलिस के बीच टकराव लंबा चलेगा। संगर, घोटकी, सक्कर, खैरपुर, पूरनपुर, मीरपुर खास और खैबर पख्तूनख्वा में ऐसी ग्रामीण और कस्बाई आबादी है जहां के लोग पुलिस का खुलकर साथ दे रहे हैं। महिलाएं, बच्चे-बूढ़े सभी रातों में भी सड़कों पर हैं। सेना की फायरिंग में सिंध पुलिस के दस टाॅप पुलिस अधिकारियों के मारे जाने के बाद आम पाकिस्तानियों में भयंकर आक्रोश है।​

​​डॉ. रमेश ठाकुर

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