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September 30, 2020
Janta ka Safar
उत्तर प्रदेश राजनीति

सूबे में ब्राह्मण पर सियासत गर्म, मायावती भी लगवाएंगी परशुराम की मूर्ति 

लखनऊ । समाजवादी पार्टी (सपा) के ब्राह्मण कार्ड के बाद अब उत्तर प्रदेश में सियासत गरमाती जा रही है। भाजपा के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने मामले को लेकर सपा को आड़े हाथों लिया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने रविवार को कहा कि यदि सपा सरकार को परशुराम की प्रतिमा लगानी ही थी तो अपने शासन काल के दौरान ही लगा देते। चुनाव के नजदीक आने पर मूर्ति लगाने की बात कही जा रही है।

उन्होंने कहा कि सपा की हालत प्रदेश में बहुत ज्यादा खराब है। ऐसे में ब्राह्मण समाज इनके साथ जाने वाला नहीं है और ब्राह्मणों का हर स्तर पर शोषण व उत्पीड़न सपा सरकार में हुआ। जबकि ब्राह्मण समाज को बसपा पर हर मामले में पूरा विश्वास है।

मायावती ने कहा कि बसपा किसी भी मामले में सपा की तरह कहती नहीं है कर के भी दिखाती है। बसपा की सरकार बनने पर सपा की तुलना में परशुराम जी की भव्य मूर्ति लगाई जाएगी। दरअसल सपा ने ब्राह्मणों को रिझाने के लिए राजधानी लखनऊ में भगवान परशुराम की 108 फीट ऊंची मूर्ति लगाने का निर्णय किया है। इसके बाद से प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से ब्राह्मण वोट बैंक को अपने पाले में करने की सियासत तेज हो गई है।

मायावती ने कहा कि कोरोना के मद्देनजर राज्य, केंद्र सरकार की कमियों को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार बनने पर ब्राह्मण समाज की आस्था के प्रतीक परशुराम और सभी जातियों, धर्मों में जन्मे महान संतों के नाम पर अस्पताल व सुविधा युक्त ठहरने के स्थानों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने ब्राह्मण समाज को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया। ब्राह्मण समाज को कांग्रेस, सपा और भाजपा ने गुमराह किया। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज का उत्पीड़न हो रही है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हमने सभी जातियों के हितों का भी पूरा ध्यान दिया। बसपा को सबको एक नजर से देखती है। 2007 के उपचुनाव में बसपा ने सभी जातियों के हितों का पूरा ध्यान रखा।

उन्होंने सपा पर हमलावर होते हुए कहा कि इसके साथ ही चार बार बसपा से जुड़े सभी वर्गों के इन महान संतों के नाम पर अनेक जनहित योजनाएं शुरू की गई थीं और जनपदों के नाम रखे गए थे, जिसे बाद में आई सपा सरकार ने जातिवादी मानसिकता और द्वेष की भावना के चलते बदल दिया था। बसपा की सरकार बनते ही इन्हें फिर से बहाल किया जाएगा।

मायावती ने अयोध्या में राममंदिर भूमिपूजन को लेकर दलित सियासत को भी हवा दी है और इसमें राष्ट्रपति का नाम भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि जब पांच अगस्त को प्रधानमंत्री ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया तो अच्छा होता अगर वो उस समय दलित समाज से जुड़े अपने राष्ट्रपति हैं, उनको भी साथ में ले जाते। कुछ दलित संत भी चिल्लाते रहे कि हमें नहीं बुलाया गया। उनको नहीं बुलाया पर राष्ट्रपति को बुला लेते तो अच्छा संदेश जाता।

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भगवान राम के नाम पर राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। सिर्फ राम मंदिर निर्माण करने से जनता का भला नहीं होने वाला।

उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर योगी सरकार को घेरते हुए कहा कि रामराज में ऐसा जंगलराज नहीं था, जो अभी है। बसपा कानून व्यवस्था के मामलों में दोषियों को नहीं बख्शती है। यहां तक की अगर हमारी पार्टी का व्यक्ति भी कानून के खिलाफ काम करता है, तो हम अपनी सरकार होने पर उसके खिलाफ कारवाई करते हैं। मायावती ने कहा कि जिस दिन उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार अपराधियों के खिलाफ राजनीति को अलग करके चलेगी और अपनी पार्टी के अपराधियों पर भी कार्रवाई करेगी तो यहां भी बसपा के शासन की तरह कानून का राज देखने को मिलेगा। कानून द्वारा कानून का राज कायम करने के लिए भाजपा को दलगत राजनीति के ऊपर उठकर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए हमारी पूर्व सरकार से सीखना चाहिए।

मायावती ने कहा कि विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है। उन्होंने जनता को चेताया कि जनता अपना वोट किसी भी प्रकार की भावना में बहकर नहीं दे। बसपा की कथनी और करनी में अन्तर नहीं है, इसलिए जनता इसी पार्टी को वोट दे। बसपा हमेशा सर्वसमाज के हितों, विकास का ध्यान रखती है। मजदूर, किसान, व्यापार सहित सभी मेहनतकश लोगों का ध्यान रखती है। ​

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