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September 18, 2021
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अगर आयी कोरोना की तीसरी लहर तो बच्चों पर नहीं होगा ज्यादा असर, जानिए क्यों

Covid-19

नई दिल्ली: अगर कोरोना (Corona) की तीसरी लहर (Third Wave) आती है तो उसके बच्‍चों (Children) पर गंभीर प्रभाव डालने के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। लैंसेट कोविड-19 कमीशन इंडिया टास्क फोर्स ने भारतीय बच्‍चों में कोविड-19 बीमारी को लेकर अध्ययन किया है। स्‍टडी में भारत में कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित बच्चों में उसी प्रकार के लक्षण पाए गए हैं, जैसा कि दुनिया के अन्य देशों में देखने को मिले हैं।

स्टडी में यह भी सामने आया है कि अधिकांश बच्‍चों में लक्षण नहीं थे। वहीं कई बच्चों में संक्रमण (Infection) के हल्के लक्षण देखने को मिले। कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद अधिकतर बच्चों में बुखार और सांस संबंधी परेशानियां भी देखने को मिली। इसके अलावा डायरिया, उल्टी और पेट में दर्द की भी समस्‍याएं बच्‍चों को हुई।

देश में कोविड-19 से कितने बच्चे संक्रमित हुए। इस बाबत राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़े तैयार नहीं किए गए हैं। लिहाजा स्‍टडी के लिए तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के 10 अस्पतालों में भर्ती बच्चों के डेटा लिए गए। भर्ती हुए 10 साल से कम उम्र के करीब 2600 बच्चों के क्लीनिकल डेटा विश्लेषण किया गया, तब रिपोर्ट तैयार हुई। इनके मुताबिक 10 साल से कम उम्र के बच्चों में कोविड-19 के कारण होने वाली मृत्यु दर 2.4 प्रतिशत रही। वहीं इन बच्‍चों में 40 फीसदी किसी न किसी गंभीर बीमारी से भी पीड़ित थे।

लैनसेट की रिपोर्ट के मुताबिक महामारी की दोनों लहरों में 10 साल से कम उम्र के 9 फीसदी बच्‍चों में बीमारी के गंभीर लक्षण मिले। स्टडी के मुताबिक महामारी की तीसरी संभावित लहर में संक्रमित होने वाले 5 प्रतिशत से भी कम बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत पड़ेगी, वहीं मृत्यु दर 2 प्रतिशत तक हो सकती है।

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