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May 7, 2021
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उत्तर प्रदेश राजनीति

कांग्रेस-अपराधियों की चाल हुई विफल, न्याय की जीत : केशव मौर्य

लखनऊ । उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सुप्रीम कोर्ट के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को पंजाब से उत्तर प्रदेश की जेल में शिफ्ट करने के शुक्रवार को दिए आदेश का स्वागत किया है। 

उपमुख्यमंत्री मौर्य ने मुख्तार को बचाने में जुटी पंजाब सरकार को लेकर कांग्रेस पर कटाक्ष भी किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से कांग्रेस और अपराधियों की चाल विफल हुई तथा न्याय की जीत हुई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्तार अंसारी को दो हफ्ते में उत्तर प्रदेश भेजने के आदेश का स्वागत किया और कहा कि अपराधियों को संरक्षण और तुष्टिकरण करने वाली राजनीति बंद होनी चाहिए।

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्तार पर तंज कसते हुए ट्वीट किया कि मुस्कुराइए…आप लखनऊ में आने वाले हैं।

इससे पहले बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के मुकदमे और कस्टडी ट्रांसफर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला दिया। अंसारी को उत्तर प्रदेश की जेल में दो हफ्ते के अंदर शिफ्ट करना होगा। पंजाब सरकार की दलीलों से कोर्ट संतुष्ट नहीं था और इस पर अपना फैसला सुनाया। इसके साथ ही विशेष कोर्ट तय करेगा कि अंसारी को इलाहाबाद या बांदा में से किस जेल में रखा जाएगा। 

पंजाब सरकार ने रूपनगर जेल में बंद विधायक व माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपने से इनकार कर दिया था। कई आपराधिक मुकदमों के लिए उप्र सरकार को अंसारी की कस्टडी की दरकार है। जनवरी 2019 से अंसारी पंजाब की जेल में है, जहां उसे जबरन वसूली मामले में नामजद किया गया था। उप्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि अंसारी की अनुपस्थिति के कारण उप्र में मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पा रही है।

उप्र सरकार की याचिका पर पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर अंसारी को उप्र सरकार की हिरासत में देने से इनकार किया था। पंजाब सरकार ने इसका कारण अंसारी के स्वास्थ्य को बताया था। जेल अधीक्षक के माध्यम से दायर हल्फमामे में कहा गया था कि अंसारी कथित तौर पर उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अवसाद, पीठ दर्द और त्वचा की एलर्जी से पीड़ित है। 

उप्र सरकार की रिट याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए पंजाब-सरकार ने कहा था कि वह चिकित्सकों की राय के अनुसार काम कर रही है। अंसारी को उप्र से दूर रखने के लिए कोई पूर्वकल्पित साजिश नहीं थी। हलफनामे में कहा गया था कि उप्र की रिट याचिका विचार करने योग्य नहीं है क्योंकि पंजाब में अंसारी को हिरासत में रखे जाने को उप्र अपने मौलिक अधिकार के उल्लंघन का दावा नहीं कर सकती।  उप्र सरकार की याचिका में कहा था कि राज्य में अंसारी के खिलाफ गंभीर मुकदमे लंबित हैं, बावजूद इसके अंसारी एक छोटे अपराध के मामले में दो वर्ष से पंजाब के जेल में है। राज्य सरकार का कहना था कि अदालत ने कई बार अंसारी को पेशी वारंट जारी किया। लेकिन, जेल अथॉरिटी ने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंसारी को उप्र भेजने में टालमटोल किया। 

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